अनिवार्य हिंदी कक्षा 12 वीं प्री -बोर्ड पेपर 2026

Sharvan Patel
0
Pre-Board Examinaion 2026
समय - 3:15 घंटे      प्री-बोर्ड
विषय - अनिवार्य हिंदी      M.M.- 80
(i) समाचार के इंट्रो या लीड को हिन्दी में किस नाम से जानते हैं? (1)
✔ सही उत्तर : मुखड़ा
(ii) रेडियो समाचार लेखन में तैयार की जा रही समाचार कॉपी में शब्दों को कितने स्पेस (दूरी) में लिखा जाता है? (1)
✔ सही उत्तर : ट्रिपल स्पेस
(iii) किसी भाषा को बोलने तथा लिखने के नियमों की व्यवस्थित पद्धति क्या कहलाती है? (1)
✔ सही उत्तर : व्याकरण
(iv) सीमित क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा कहलाती है— (1)
✔ सही उत्तर : उपभाषा
(v) स्वतंत्रता, समानता, भ्रातृत्व पर आधारित समाज को लेखक ने कैसा समाज कहा है? (1)
✔ सही उत्तर : आदर्श समाज
(vi) जैनेन्द्र को किस उपन्यास ने मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठा दिलाई? (1)
✔ सही उत्तर : त्यागपत्र
(vii) सर्वप्रथम साहित्य में आंचलिक शब्द का प्रयोग किसने किया? (1)
✔ सही उत्तर : फणीश्वर नाथ रेणु
(viii) दूरदर्शन के संचालक ने स्वयं को क्या बताया है? (1)
✔ सही उत्तर : समर्थ शक्तिवानमा
(ix) निम्न में से कौन-सी काव्यकृति कवि बच्चन की नहीं है? (1)
✔ सही उत्तर : अनामिक
(x) “तुलसी ने कहा करो” तुलसीदास दुःखी क्यों है? (1)
✔ सही उत्तर : उपर्युक्त सभी
(xi) ‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी की मूल संवेदना किसे कहेंगे? (1)
✔ सही उत्तर : (अ) एवं (ब) दोनों
(xii) ‘जूझ’ पाठ के लेखक को शिक्षा से पुनः जोड़ने में किसका योगदान था? (1)
✔ सही उत्तर : दत्ताजी राव देसाई
स्कोर: 0 / 12
प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए—
(i) मुख्य अर्थ में बाधा होने पर किसी रूढ़ि या प्रयोग के आधार पर लक्ष्यर्थ से सम्बन्धित अर्थ लिया जाता है, उसे ....................... शब्द शक्ति कहते हैं। (1)

(ii) “मालिक ने नौकर से कहा—अँधेरा हो गया है।” वाक्य में ....................... शब्द शक्ति है। (1)

(iii) जहाँ शब्द की आवृत्ति हो किन्तु अर्थ भिन्न हो, वहाँ ....................... अलंकार होता है। (1)

(iv) “कोकिल, कैसी, कोरि कूकै है कानन में।” काव्य पंक्ति में ....................... अलंकार है। (1)

(v) ‘PETITION’ शब्द के लिए हिन्दी पारिभाषिक शब्द ....................... है। (1)

(vi) ‘राजपत्र’ शब्द के लिए अंग्रेजी पारिभाषिक शब्द ....................... है। (1)
प्रश्न 3. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए—
नागरिकरण की प्रवृत्ति सारे विश्व में काम कर रही है। नागरिकरण की यह दिशा स्पष्ट छोटे समुदायों की समाप्ति की दिशा है। भारत में भी शहरों की जनसंख्या अभी प्रतिवर्ष पैंतीस लाख के हिसाब से बढ़ रही है। भले ही मनुष्य के पास तर्क एवं बुद्धि है और वह अपने जीवन को अपनी इच्छा के अनुसार व्यवस्थित कर सकता है। विज्ञान में ऐसा कुछ निहित नहीं है जो मनुष्य को विशाल, विकट वस्तियों के अनावश्यक रूप से रहने के लिए बाध्य करता हो। वर्तमान नागरिकरण प्रवृत्ति के कुछ आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कारण हैं। ये शाश्वत नहीं हैं और उन्हें प्रखर मानवीय प्रयत्न से परिवर्तित किया जा सकता है। इसमें संदेह नहीं कि गाँव आज जैसा है, वैसा यदि रहता है तो नागरिकरण की प्रवृत्ति रोकी नहीं जा सकती। लेकिन यदि मानव समाज का निर्माण छोटे प्राथमिक समुदायों के आधार पर कर सकता है तो आज के गाँवों के ऐसी बस्तियों में परिवर्तित किया जा सकता है जो हर दृष्टि से आकर्षक होंगी और तब सामान्यतः कोई भी उन्हें छोड़ना नहीं चाहेगा।
(i) गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है— (1)


(ii) नागरिकरण की प्रवृत्ति को हम कैसे रोक सकते हैं? (1)


(iii) प्रतिवर्ष शहरों में जनसंख्या बढ़ने का क्या कारण है? (1)


(iv) भारत में शहरों की जनसंख्या किस हिसाब से बढ़ रही है? (1)


(v) विज्ञान में किसे निहित नहीं बताया गया है? (1)

(vi) वर्तमान में नागरिकरण की प्रवृत्ति क्यों बढ़ रही है? (1)
प्रश्न 4. निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए—
मैने, कौतूहलवश, आँगन के कोने की
गीली तह को यूँ ही उँगली से सहलाकर
बीज सेम के दबा दिए मिट्टी के नीचे।
भू के आँचल में मणि माणिक बाँध दिए हैं।
ओह, समय पर उनमें कितनी कलियाँ टूटी!
कितनी सारी फलियाँ, कितनी प्यारी पत्तियाँ;
यह धरती कितना देती है! धरती माता
कितना देती है अपने चार पुत्रों को!
नहीं समझ पाया था मैं उसके महत्व को!
बचपन में, छिछोरे स्वार्थ लाभ बस पैसे बटोर।
रज सजती है वसुधा, अब समझ सका हूँ।
(i) उपयुक्त काव्यांश का उचित शीर्षक है— (1)

(ii) कवि ने धरती में सेम के बीज क्यों दबा दिए? (1)

(iii) ‘तू प्रसन्नि है वसुधा’ — इसका क्या आशय है? (1)

(iv) कवि किसके महत्व को नहीं समझ पाया था? (1)

(v) कवि को किस चीज़ ने प्रसन्न किया? (1)

(vi) कवि ने किस इच्छा से धरती में सेम बोये थे? (1)
खंड – ब
प्रश्न 6. इंटरनेट पत्रकारिता से क्या आशय है? (2)

प्रश्न 7. मीडिया की भाषा में ‘बीट’ का क्या आशय है? (2)

प्रश्न 8. रेडियो नाटक में पात्रों की संख्या कितनी होती है? (2)

प्रश्न 9. ‘वे लोग बाजार का बाजारीकरण बढ़ाते हैं।’ ‘बाजार-दर्शन’ अध्याय के आधार पर बताइए कि ‘वे लोग’ किसके लिए कहा गया है और वे बाजारपन क्यों बढ़ाते हैं? (2)

प्रश्न 10. ‘बिजली की तरह चमक रहे हैं लट्ठे’ फिराक गोरखपुरी ने रक्षा-बन्धन के लट्ठों अर्थात धागों को बिजली की तरह चमकता क्यों बताया है? (2)

प्रश्न 11. मुहन्जो-दड़ो हड़प्पा से मिली नर्तकी की मूर्ति के सम्बन्ध में पुरातत्त्वविद मार्शल बोलते ने क्या कहा था? (2)

प्रश्न 12. कवि भी अपनी आत्मा के बाहर-भीतर मनुष्य हो सकता है। आनंद को स्पष्ट भाव से समझाइए। (2)
खंड – स
प्रश्न 13. समाज में बाजार का सर्वव्यापक और समाज को शासित कर देने से ‘बाजार दर्शन’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (3)

अथवा
‘काले मेघा पानी दे’ निबन्ध के माध्यम से लेखक ने वर्तमान की किस समस्या की ओर संकेत किया है और कैसे?

प्रश्न 14. ‘आत्मपरिचय’ कविता में कवि ने क्या प्रेरणा या सन्देश दिया है? (3)

अथवा
‘अशनि-पात से स्थापित उर शत-शत वीर’ पंक्ति में कवि निराला जी ने किसकी ओर संकेत किया है?

प्रश्न 15. ‘सिन्धु घाटी की सभ्यता मूलतः खेतिहर और पशुपालक सभ्यता थी।’ ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (3)

अथवा
एक गुरु किस प्रकार एक विद्यार्थी के जीवन को नई दिशा दे सकता है? ‘जुर्म’ पाठ के आधार पर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 16. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का कवि परिचय लिखिए। (3)
प्रश्न 17. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए— (4)
धूत कहो, अवधूत कहो, रजपूत कहो, जुलाहा कहो कोउ। काहू की बेटी बेटा न ब्याह, काहू की जाति बिगार न सोउ॥ तुलसी सराहत गुनहि राम को, जानि को रूप न कहे कछु और। माँगि के खैबो, मस्जिद में सोइबो, लेबो कोउ न दोउ॥

अथवा

जनम से ही अपने साथ लाते हैं कपास
पृथ्वी घूमती हुई आती है उनके बेचैन पैरों के पास
छतों को भी नरम बनाते हुए
दिशाओं को मुट्ठियों की तरह बजाते हुए
जब वे पाँव भरते हुए चले आते हैं
डाल की तरह लचीलें वे से अक्सर
छतों के खतरनाक किनारों तक—
उस समय गिरने से बचाता है उन्हें
सिर्फ उनके ही संगठित शरीर का संगीत

प्रश्न 18. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए— (4)
यह विडम्बना की ही बात है कि इस युग में भी ‘जातिवाद’ के पोषकों की कमी नहीं है। इसके पोषक कई आधारों पर इसका समर्थन करते हैं। समर्थन का एक आधार यह कहा जाता है कि आधुनिक सभ्य समाज ‘कार्य-कुशलता’ के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक मानता है, और चूँकि जाति-प्रथा भी श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है। इस तर्क के सम्बन्ध में पहली बात तो यह असत्यापन है कि जाति-प्रथा श्रम विभाजन के साथ-साथ श्रमिक-विभाजन का भी रूप लिए हुए है।

अथवा

जेठ की जलती हुई धूप में जबकि धरती निःश्वास अधीर बनी हुई थी, शिरीष नीचे से ऊपर तक फूलों से लद गया था। कम फूल इस प्रकार की गर्मी में फूल सकने की हिम्मत करते हैं। कवित्व और असाध्य (असहायता) की बात मैं भूल नहीं रहा हूँ। वे भी आस-पास बहुत हैं लेकिन शिरीष के साथ असाध्य की तुलना नहीं की जा सकती। वह पन्द्रह-बीस दिन के लिए फूलता है, बसन्त ऋतु के पलाश की भाँति। कवि-हृदय को इस तरह बहुत दिन के लिए लहलह उठना पसन्द नहीं था। यह भी क्या कि दस दिन फूले और फिर खंखड़-के-खंखड़—दिन दस फूला फुलके खंखड़ गया पलाश!
खंड – द
प्रश्न 19. ग्रामीण मजदूर बैंक, क्षेत्रीय कार्यालय, पाली की ओर से कार्यालय स्थान-परिवर्तन की आम-सूचना सम्बन्धी एक विज्ञप्ति का प्रारूप लिखिए। (5)

अथवा
सचिव, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर की ओर से पुलिस महानिदेशक, राजस्थान, जयपुर को एक अर्द्धशासकीय पत्र लिखिए, जिसमें बोर्ड परीक्षा के प्रत्येक केन्द्र को पुलिस सुरक्षा देने का आग्रह हो।

प्रश्न 20. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबन्ध लिखिए। (5)

1. आत्मनिर्भर भारत
2. बढ़ती महँगाई का जीवन पर प्रभाव
3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता का वर्तमान स्वरूप
4. मोबाइल फोन : वरदान या अभिशाप

Post a Comment

0 Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!